कितनी दफा बोला था
कितनी दफा कहा था
पर तुमने मेरी एक न सुनी मेरी
अब तुम तो जन्नत के मजे ले रहे होऔर में
यहा तुम्हे याद कर कर के बिलख रही हूं
गलती मेरी थी
मुझे तुमसे प्यार नहीं करना चाहिए़ था
और प्यार किया तो किया पर मैंने तो शादी करके उससे भी बड़ी गलती करली..
तुम्हारे साथ रहेनाहसना गाना जीनातुमपे मरना
वक्त के हरएक पल को जीभर के जीना
सब कुछ मेरी आदत बन गया था
और तुम मेरी इबाबत..
कितने वादे और सोगाते किये थे मुझसे
पर एक बार भी यह नहीं बताया की में जा रहा हूं
हमेंशा के लिऐक्यों चले गए तुम !
इतनी भी क्या जल्दी थी !
(मेंटल वॉर्ड के भीतर कोने में पड़ी थी इक डायरीउसमें लिखी कविता के साथ उस दिन कविता को मेंने पहेली बार देखा – मेरी प्रेक्टिस का आज पहला दिन था)
~ Dr.Hiral Jagad(Clinical Psychologist)



